January 23, 2021

Kori/koli Samaaj

कोरी

Kori Samaj ki Gaurav Jhalkari Bai - कोरी समाज का गौरव झलकारी बाई Order now

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से

कोरी जाति: कोरी एक हिन्दू जाति है जिनको कोलीबुनकर तथा जुलाहा के नाम से भी जाना जाता है। यें उत्तर भारत के सभी जनपदों में निवास करतें है। इनके पूर्वज खेती, कपडा बुनाई इत्यादि कार्य करते थे एवं कुछ क्षत्रिय थे। वर्तमान में येें सभी राज्यो में सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों में कर्मचारी व अधिकारी पदों पर कार्यरत है और राजनीति में भी इस जाति का काफी अच्छा योगदान है। यें प्रायः सिंह, वर्माकोरी एवं अपने गोत्र के उपनामो द्वारा पहचाने जाते है। 

महाराष्ट्र में इस जाति की काफी जनसंख्या है। गुजरात में 20 से 22 प्रतिशत जनसँख्या कोरी (कोली) जाति की है। श्रीराम के इक्षवाकु वंश से सूर्यवंशी, सूर्यवंशी से कोलिय और इससे कोली अथवा कोरी जाति विकसित हुई। आज समय के साथ-साथ अलग-२ स्थानों पर इसे अलग-२ नामों से इंगित किया गया है, जैसे- कोरी, कोली, बुनकर, हिन्दू जुलाहा, कबीर पंथी, भुइयार, तंतवाय आदि। महाराष्ट्र मे यह जाती कोली महादेव, टोकरे कोली आदिवासी नाम से जानी जाती हैं और इनको यहाँ अनुसूचित जनजाति मे शामिल किया गया हैं!

 प्राचीनतम राजा मन्धाता, एक सर्वोपरि और सार्वभौमिक राजा थे जिनका प्रताप भारत में सर्वत्र था और जिनके शौर्य और यज्ञों की कथाएँ मोहन जोदड़ो के शिलालेखों पर अंकित हैं, वे इसी जाति के थे। सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में इसी जाति की एक वीर क्षत्रिय झलकारी बाई ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के प्राण बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी जोकि उनकी बहुत करीबी साथी और उनकी हमशक्ल थी। भारत के वर्तमान राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी भी इसी जाति से हैं। कोरी समाज ने देश और दुनिया को कईं महान बेटे व बेटियाँ दी हैं जिनकी शिक्षाओं का सार्वभौमिक महत्व और प्रासंगिकता आज आधुनिक जीवन में भी है। इस जाति के लोग बहुत शांत स्वभाव के एवं बहुत शालीन होतें है जिनके द्वारा कभी भी कोई हिंसा या दंगा सुनने में नही आता। उत्तर प्रदेश में कोरी एक अनुसूचित जाति है जिनकी जनसंख्या जनगणना 2011 के अनुसार 2,293,937 है। 

अशोक महान कोरी कबीले से 

कोरी समाज, गौतम बुद्ध के वंशज हैं
– गौरीशंकर
लखनऊ,  हाल ही मे हुये यूपी के विधान सभा चुनाव मे, बुंदेलखंड मे कोरी समाज ने एतिहासिक प्रदर्शन किया. बुंदेलखंड की कुल 19 सीटों मे से 05 सीटों पर केवल कोरी समाज के विधायकों ने सफलता के झंडे गाड़कर अपनी राजनैतिक जागरूकता और सामाजिक एकता  का उदाहरण पेश किया. साथ ही पूरे प्रदेश से 10 विधायक निर्वाचित हुये. यूपी की बीजेपी सरकार ने 10 मे से 2 विधायकों को योगी सरकार मे मंत्री भी बनाया . कोरी समाज की राजनैतिक जागरूकता और सामाजिक एकता पर ”न्यूज 85 डाट इन” की सब एडिटर नीति वर्मा ने कोरी समाज के प्रमुख संगठन वीरांगना झलकारी बाई विकास समिति के संरक्षक गौरी शंकर जी से बातचीत की-

1-कोरी समाज की  उत्पति कैसे हुई ?
गौरीशंकर- कोरी समाज की उत्पति 20 हजार साल पहले कामध रृषी से हुई. हमारे पूर्वज बहुत ज्ञानी थे, उन्होने कपास का निर्माण किया और इस काम को आगे बढ़ाया. यह हमारा पैतृक व्यवसाय है. कपास की सबसे ज्यादा खेती सूरत मे होती है. कोरी एक बुनकर जाति है.
 जो कि उत्तर भारत के सभी जनपदों में निवास करती है। यह अलग-२ स्थानों पर अलग-२ नामों से जानी जाती है जैसे- भुइयार, कोली, तंतवाय, हिन्दू जुलाहा, कबीर पंथी आदि। गौतम बुद्ध कोरी समाज से हैं. झलकारी बाई भी कोली समाज की है.इन्होने देश के लिए बहुत सी कुर्बानियां दी है. जिससे हमारे समाज को और पूरे देश को आजादी मिली है.

2- भारत मे कहां-कहां सबसे ज्यादा आपकी जनसंख्या है?
गौरीशंकर- वैसे तो हमारी जनसंख्या पूरे भारत मे है लेकिन सबसे ज्यादा दक्षिण भारत मे है . इसके अलावा यूपी और एमपी मे भी हमारी काफी संख्या है. यूपी मे बुंदेलखंड के सभी जिलों मे, इसके अतिरिक्त अमरोहा, जालौन, इटावा आदि मे भी कोरी समाज काफी संख्या मे है. मै अापके चैनल के माध्यम से यह कहना चाहुंगा कि यूपी मे कोरी समाज को एससी सर्टिफिकेट दिया जाता है पर कोली जाति को नही दिया जाता. कोली जाति को पिछडे वर्ग मे शामिल किया गया है लेकिन कोरी और कोली एक ही जाति है. हमारी उत्पति कोली जाती से ही है. दिल्ली, पश्चिमी यूपी, हाथरस, और कई जगह कोली ही लिखा जाता है.

3-कोरी समाज मे महानायक कौन-कौन थे?
गौरीशंकर- हमारे समाज मे कई महानायक हैं.  झलकारी बाई, महात्मा गौतम बुद्ध कोरी समाज से है. महात्मा गौतम बुद्ध को लोग क्षत्रिय समझते है लेकिन वह कोरी समाज से आते है. गौतम बुद्ध जी की भारत मे मान्यता कम कर दी गई है. जबकि पूरे विश्व मे उनका गुण गान हैं . कबीर जी भी हमारे समाज के है. पूरा समाज पूरा देश उनके बताये हुये पथ चिन्हो पर चल रहा है.

4- अापके पैतृक व्यवसाय के बंद होने का क्या कारण है ?
गौरीशंकर- देश की अाजादी के बाद, कुछ दिनों तक हमारा पैतृक व्यवसाय  चला, लेकिन फिर बंद हो गया.जब देश आजाद हुअा तब हमारी जनसंख्या अनपढ़ थी. बाबा साहब ने इसलिए सविधांन बनाया था तकि वह पिछड़े और दलितो को आगे कर सके. पं.जवाहर लाल नेहरु ने और महात्मा गॉधी ने कसम खाई थी कि बुनकर व्यवसाय को दस साल मे आगे बढ़ाएगें लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ.जो कपड़ा बुनने की मिले थी उनका एडमिनिस्ट्रेशन ही खराब था, सरकार ने मिलो को बदं कर दिया.प्रधानमंत्री मोदी जी ने हमारे व्यवसाय को सम्मान देने के लिए कहा है लेकिन अभी तक कुछ किया नही है.

*कोली
 (Story Of India’s Historic People - The Kolis)*

“एक समय आता है जब हममें से प्रत्येक व्यक्ति पूछता है, ‘मैं कौन हूँ? मेरे पुरखे कौन थे? वे कहाँ से आए थे? वे कैसे रहते थे? उनकी बड़े कार्य क्या थे और उनके सुख-दुख क्या थे?’ ये और अन्य कई मूलभूत सवाल हैं जिनके बारे में हमें उत्तर पाना होता है ताकि हम अपने मूल को पहचान सकें.

भारत के मूलनिवासी कबीलों के बारे में अध्ययन करते हुए हमारे विद्वानों ने अति प्राचीन रिकार्ड और दस्तावेज़ – वेद, पुराण, विभिन्न भाषाओं के महाकाव्य, कई पुरातात्विक रिकार्ड और नोट्स और कई अन्य प्रकाशन देखे हैं.


इतिहास और एंथ्रपॉलॉजी के विद्यार्थियों ने प्रागैतिहासिक (Pre-historic) और भारत के स्थापित इतिहास में भारत के इस प्राचीन कबीले का चमकता अतीत पाया है और लगातार चल रही खोज में और भी बहुत कुछ मिल रहा है.


यह आलेख गुजराती में लिखे मुख्यतः तीन प्रकाशनों पर आधारित है. ‘भारत का एक प्राचीन कबीला – कोली कबीले का इतिहास’ – इस पुस्तक का संपादन श्री बचूभाई पीतांबर कंबेद ने किया था और भावनगर के श्री तालपोड़ा कोली समुदाय ने प्रकाशित किया था (पहला संस्करण 1961 और दूसरा संस्करण 1981), 1979 में ‘बॉम्बे समाचार’ में प्रकाशित श्री रामजी भाई संतोला का एक आलेख और डॉ. अर्जुन पटेल द्वारा 1989 में लिखा एक विस्तृत आलेख जो उन्होंने 1989 में हुए अंतर्राष्ट्रीय कोली सम्मेलन में प्रस्तुत करने के लिए तैयार किया था.

Kori’s List
  •  Brijendra Kumar Verma – Govt.School Teacher – Konch, District – Jaluan(U.P.)phone: 8765564230
  • Anoop Arya – Asstt Professor at Electrical Deptt.NIT(M.Tech) – Bhopal (M.P.)
  • Dr. Varun Deo.- Demosnstrator at Gandhi Medical College – Bhopal (M.P.)
  • Rajesh Shakyawar – Civil Engineer at PHE Department – Jabalpur (M.P.)
  • Harishchandra Anuragi – Video Editor in E. Tv.News M.P – Indore(M.P.)
  • Dr. Harish Kori – Physician And Surgen(M.B.B.S.) – Mumbai
  • Arjun Kori – Polytechnic ELECTRONICS ENGG – Kanpur
  • Bhoopendra Arya – PG Teacher in KV – Bhusawal
  • Ajay Kumar Verma – Jr. Computer Programmer- Sanjay Gandhi Post Graduate Institute of Medical Sciences Lucknow phone: 9415728736
  • Manoj kumar Verma- Govt school teacher GNCT DEHLI
  • Jai kishore Mahaur – Scientific Asstt. in Dept of Atomic Energy, Indore
  • राकेश कुमार शाक्‍या, बी.एच.ई.एल. भोपाल ,सहायक पद
  • Rajneesh singh koli.-B.tech. (Civil engineering) -9807072886
  • Er B P Shakya (Ministry of Defence-DRDO)-9301171492
  • Dr. Ajay Singh Shakya-Apollo Hospital-Delhi-8010349712
  • Mr Dharmendra Singh Shakya ( managaer Maharaja College)-9039965846
  • Mr Rajat Shakya (Architect) MITS, Gwalior-7869495947
  • Dr Deepak Shakya- Sagar Medical College-8103090333
  • Ms Rajani Shakya (Architect), Asst Professor, MODI University, Jaipur
  • Vikas Panthi (Asst. Professor) Vidisha – 9778460751
Patel is the nickname of Koli caste of Gujarat . These are all zamindars and are found especially in South Gujarat and Daman and Diu . All Koli Patels of Gujarat consider themselves to be the descendants of Gautam Buddha . In the beginning of the British rule , the Koli Patels were killed by the British. English historian Rosa Maria Perez wrote that Koli Patel was much more infamous for robbery. Koli Patels were also known as Mandhata Patel. These gotras are more common in Koli Patels. Chauhan , Rathore , Makwana

Kotwal is the title of Talpada Kolis of Gujarat . He served as the village and fort's Kotwal in Gujarat. For which he was awarded the title of Kotwal. These are mostly found in the Gujarat Kar Mahi kantha .

Baria is a subgenus of Koli caste found in Gujarat . He has taken his name from Deogarh Baria Sahar in Gujarat . which until 1782 was known simply as Baria. Baria Koli is a branch of Talpada Koli in Gujarat. Their main work is farming. The history of Baria Kollis has also been in the form of sea looters. Baria Kolion by waza Rajputs from talaja was stripped. Baria Koli was a very courageous sea looter. They also looted British ships. In view of this, the British Maritime Army and Bhavnagar in 1771The princely army of the princely state attacked the Koli sea looters. There was a fight between Koli and Seno in which Koli was defeated. Many clans are found in Baria Kolis, some of which are like this. Baria, Patel , Pagi, Damor, Khant, Parmar , Chauhan , Pandor, Rangra and Maliwad. Baria Koli ruled the princely state of Narukot in Gujarat . Baria Kolis also ruled the state of Sathamba in Gujarat till 1948. This princely state used to come in Mahi Kantha Agency.

Khant is a sub-family of Koli caste found in Gujarat . Khant Koli King Dhan Meer established Dhandhuk and Dhandalpur and Petlad was also founded by Khant Koli. The Khant Kolis of Gujarat ruled the Amaliyara princely state in Gujarat till 1948. The Khant Kolis of Gujarat established and ruled Dhandhuk, Dhandalpur, Petlad, Mahiyari in Gujarat. He also ruled Bilkha Chovisi. The Khant Kolis restored the princely state in Gujarat. The princely state (Gujarat) was ruled by Parmar Rajputs . But in 1753 the princely state King Rattan Singh died went to take advantage of it while Banswara infield Maharawal invaded Earth Singh Sant homestead and killed three sons of a saint state but fourth prince Badan Singh concealed the Khant Koliyon the Malwa region Prince Badan Singh was an infant at that time. Maharawal Prithvi Singh Sisodia of Banswara StateCaptured the princely state and deployed his army. Prince Badan Singh of the princely state was raised by a Koli Koli of Malwa. After a few years, when Prince Badan Singh grew up, the Kolis of Malwa attacked Maharaval Prithvi Singh Sisodia's army. There was a war between Maharawal's army and the Kolis of Malwa region and the Koli Jati defeated Maharawal Prithvi Singh Sisodia of Banswara in a battle and took possession of the princely state. After this Prince Badan Singh of the princely state was called and anointed the kingdom of Rana Badan Singh Parmar.

Ghadiya is a sub - caste of Koli jati which is found in the state of Gujarat . They have taken this name from the Ghade extension of Saurashtra . Now he has started to make a marriage relationship with Chuwalia Koli . Ghadiya Koli is Suryavanshi and is the consort of Lord Mandhata . Their main work is farming.

Dharala is the surname of the Kolis of Gujarat . Dharala was spoken to those Kolis who were very expert in swordsmanship . These were especially Talpade Koli. Gujarat Kheda in 1803 to capture the district British East India Company took over Kolion Disarming Act imposed whereby coli could not keep a weapon. But coli are strongly Virod of this Act and determined to kill or be killed. After this, the British dragged the Koli caste into a bloody caste. But the Koli chiefs (Koli Thakor ,Koli Patel ) pleaded in Kacheri that the British government had no authority over the Kolis, all of them should be stopped but nothing happened. The Koli zamindars then looted the British-ruled cities and villages. The British government warned the Kolis, but the Kolis, denying the British government, said that this is our family right, whatever we do, it is our way of collecting tax and for a long time Koli continued to sterilize the British government. In 1808, Koli became more intense and the English began to kill the British and British and used their weapons to gather. In Farbury 1808 the company sent the British Army and imprisoned some of the Kolis in prison. But the darkening Koli rebels attacked the prison itself. Killed all the soldiers and employees of the prison, looted arms and destroyed the prison and rescued the Kolis. In 1810, the British formed an army against Koli and the Kolis were largely taken captive and taken to the Prince of Wales island and some Kolis were kept in Kheda Jail. After this, 500 Kolis together attacked the Kheda Jail and created a huge uproar and liberated all the Kolis. But the Kolis called Prince of WalesDabip was taken away and could not save them. After this, Koli became even more dreadful. The British increased the amount of their army, but if nothing happened, the British sought help from the princely state of Vadodara because they had the local information correctly and the princely state of Vadodara sent their army in large quantities so that they would grow and strengthen with the British. But the Kolis defeated both the British Army and the Vadodara Army. After this Ahmedabad The British Collector suggested that they should attack only the Koli chiefs and this suggestion worked. But only a few Kolis were able to overcome this, Koli continued fighting like this till 1840. After 1840, the British got some rest because now Koli were paying more attention to the Zamidari but again in 1857, the Kolis took up arms against the British in the villages and towns of Maharashtra and Gujarat.

Son Koli is a sub-caste of Koli caste of Maharashtra . Keolis have derived their name from gold. Son Koli Matsya is associated with industry but some Son Koli are landowners. Son Koli is also famous for many different types of dance for men and women. Some Son Koli began to believe in Christianity during Portuguese Sasan in India , which are still found mainly in Mumbai . Son Koli Bohat was a good swimmer and had worked in large numbers in the Portuguese Maritime Army, Maratha Samudri Army and British Indian Maritime Army. Lai Patil, who was the general in the Maratha army, was Son Koli from the caste. 
Gotra 

Twenty six sahi gotra of india according to james to.

Babaria is the tribe of the Kolis of Gujarat . They are also called Bavaliya . Babriyagarh of Gujarat got its name from the ringing of Babriya Kolis . Babaria was more infamous for the Koli loot party. Whenever he used to gather anywhere, he used to say that we will strike there i.e. that the loot of Koli was called Dhang.

Makwana is the tribe of Koli caste living in Gujarat . This gotra is found in Koli Patel and Talpada Koli. Some Makwana Kolis had converted to Muslim religion, they are Muslim zamindars. Makwana Kolis ruled many small princely states such as Dedharota princely, Ilol princely state, Kadoli princely state, Palej princely state, Prempur princely state, Vaktapur princely state, Katosan princely state, Dabha princely state, Punadara princely state, Khadal Principality, State of Ramas, State of Derol, Principality of Hapa. All the Koli kings held the title of Thakor .

Vanakpal is the tribe of Kolis of Maharashtra . Vanakpal gotra is especially found in Mahadev Kolis. Vanakpal Koli was the chieftain and mansabdar in the Bahmani Sultanate and the Ahmednagar Sultanate . The social and religious head of Vanakpal Kolis was given the title of Sarnaik and he was the one who looked after their affairs.

Chivhe is the tribe of the Kolis of Maharashtra . Which especially Zamindar were Maratha empire were castles in which Naik and Srnaik were awarded the titles of. The Kolis of the Chivhe gotra had snatched the Purandar Fort from the Mughals at the behest of Chhatrapati Rajaram Raje Bhonsle . The Purandar Fort and the Sinhgad Fort have been ruled by four Kolis. A Koli named Isu Chivhe was awarded the title of Sarnaik of Purandar and was also given 6030 bighas of land. Peshwa in 1763 Had made Abha Purandare as Sarnaik due to which the four Kolis revolted against the Peshwa and captured Purandar and Sinhagad Fort. If the Kolis did not like Abha Purandare, Abha removed the Kolis from the fort and posted new fortresses, which led to the Kolis invading the forts on 7 May 1764 and taking possession. Five days later, Rudramal Fort was also captured and presented to the Prime Minister of the Maratha Empire, Peshwa Raghunathrao . A few days later, Peshwa Purandar came to the fort to worship the deity inside the fort but the Peshwa climbed his hands in the Kolis. The Kolis looted all the Peshwa's belongings and weapons and took him captive but left after some time. Then Kolion the region surrounding the makingStarted settling. Subsequently Kolion the Srnaik Kondaji Civhe the near Peshwa letters sent was stated and Mr How is everything, be fun Government is going on '. After reading this letter, the Peshwa felt very humiliated and furiously ordered the Maratha army to attack, but the army could not do anything because Koli himself was a fortress and had fortified the forts properly and the Peshwa had to face failure. Had to see. After Ishpe, the disgraced Peshwa started capturing the colonies of Chivhe gotra ( Vans ). All those living in the authorized part of the Koli Peshwa of the Chivhe gotra got all of them converted into Baagis and started captive. After this, the four girls called MadhavraoAfter sending the letter to the Peshwa and explaining it to the Peshwa, the Kolis handed over the forts to Madhavrao and the four Kolis were handed over the fort again.

Thorat is the gotra ( clan ) of Koli caste settled in Maharashtra . By 1262, Daman and Diu were ruled by the Thorat Kolis.

Shandilya and Kashyapa in Himachal Pradesh .

Jallia is a tribe of Kolis of Gujarat. The Kalies of the Jaliya gotra ruled the Dehwan region of Gujarat. Thakur Saheb is called the Kolis of the Jaliya gotra .

मुगल सम्राट जहांगीर के खिलाफ कोली 

1613 गुजरात के बाहरी इलाके में रहने वाले कोली जाति के लोगों के विरुद्ध गुजरात सलतनत के सुल्तान जहांगीर ने एक हिंसक फरमान जारी किया जिसके अनुसार कोलीयों का कत्लेआम कराया गया .क्योंकि ये कोली गुजरात सल्तनत में लूट मार के लिए प्रसिद्ध थे .1613 में, फरमान जारी होने के बाद कोलीयो ने जहांगीर के खिलाफ बड़ी संख्या में हथियार उठाए। जिसमें लगभग 200 कोली मुखिया (गांवों की मालिक-ठाकोर कोली, पटेल कोली और कोली तालुकदार) थे। जहांगीर की सेना से लडते हुए बड़ी संख्या में कोलीयो को मौत की प्राप्ति हुई इसके बाद जहांगीर ने पहाड़ी और रेतीले इलाकों में रह रहे कोलीयों को भी। ज़हांगीर की भी काफी सेना मारी गई और इस लड़ाई में 169 कोली मुखिया मार दिए गए 

कोली शहिद स्तंभ का इतिहास 

(Matwad,Navsari,Gujarat) 

सत्याग्रह आंदोलन के संदर्भ में अंग्रेजों के खिलाफ कोलीयों ने मटवाड गांव मे बैठक रखी थी बैठक के दौरान अंग्रेजों न अचानक से कोलीयों पर हमला कर दिया और बंदूकों से गोलीयां दागने लगे। इस हमले में मगन भाई पटेल नाम के कोली जमींदार को गोली लगी और उसकी मृत्यु हो गई। मगन भाई पटेल के शव को अंग्रेजों ने अपने घेरे में ले लिया और शव को कोलीयों के हवाले नही किया तो कोली महिलाएं विद्रोह पर उतर आईं और अंग्रेजों पर टूट पड़ीं। लेकिन कहीं कोली विद्रोह ना कर दें इसी डर के कारण अंग्रेजों न चुपचाप मगन भाई पटेल के शव को कोली महिलाओं के हवाले कर दिया। लेकिन जिस बात का डर था वही हुआ मगन भाई पटेल का शव मिलने के बाद कोलीयो ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह कर दिया और हथियार उठा लिए।अंग्रेज और कोलीयों के बीच लड़ाई हुई जिसमें 2 कोली जमींदार और शहिद हो गए थे। 

15 August 1947 को देश आजाद होने के पश्चात नवशारी में शहिद शमारक समिति बनी और शहिद शमारक समिति ने मगन भाई पटेल और 2 और कोली शहिदों की याद में मटवाड गांव में कोली शहिद स्तंभ (Koli Sahid Stambh) का निर्माण किया। 

शहिदों के नाम 

(1) कोली श्री मगन भाई धान्जी भाई पटेल (मटवाड गांव) 

(2) कोली श्री रंछोड भाई लाला भाई पटेल (कराडी गांव) 

(3) कोली श्री मोरार भाई पोछीया भाई पटेल 

During The Satyagraha Agitation, Kolis Did 

A Meeting In Matvad Village. During The Koli's Meeting, British Army Atacked At Kolis. In This Attack , A Koli Named Maganbhai Dhanjibhai Patel (Landlord Of Matvad Village) Was Killed By British Army. British Army Didn't Gave The Dead body Of Patel Koli To Kolis. So Koli Women Became Rebels & Attacked At British Army. The Dead body Of Patel Koli Captured by Koli Women From British Officials. After This , Koli Community Revolted Against British Rule. Kolis Handed The Arms & Fought Against British. In This Rebellion Two More Kolis Was Killed By British. Their Name Was Ranchodbhai Lalabhai Patel & Morarbhai Pochiabhai Patel . After Independence Of India, A Committee Named Sahid Smarak Samiti Was Created In Navsari Town. This Committee Built A Piller Named Koli Sahid Stambh In The Memory Of Three Koli Freedom Fighters Who Fought For Their Land.Posted 1st September 2017 by Koli Prem Singhji Mahaur 



1857 में, पेंथ रियासत (Penth State) की कोली जाति के लोगों न अंग्रेजों के खिलाफ भयंकर विद्रोह किया। 6 December 1857 को 2000 बागी कोलीयो न पेंथ के हरसोल नगर को लुट लिया। अंग्रेजों ने मामलातदार (Complicated Matter & Case Officer) को हरसोल नगर की जांच पड़ताल के लिए भेजा लेकिन बागी कोलीयो ने मामलातदार को ही गायब कर दिया और बंदी बना लिया। इसके बाद कोली पेंथ रियासत में और ज्यादा आतंकी हो गए। बागी कोलीयो ने Lieutenant Glasspool और उसके 30 साथीयों को घेरकर बोहत मारा। कोली विद्रोह को देखते हुए अंग्रेजों को पेंथ रियासत के राजा भार्गव राव पर सक हुआ और कचेहरी म बुलाया। पता चला कि कोली विद्रोह की योजना राजा भार्गव राव और रानी के दिवान न 6 हफते पहले ही बनाई थी। अंग्रेजों ने राजा और 15 साथीयों को राजद्रोही घोषित करके फांसी पर लटका दिया। 

इसके बाद बागी कोलीयो न कचहरी पर हमला कर दिया और अंग्रेजी पुलिस वालों को मार डाला और हथियार लेकर खजाने पर हमला कर दिया। और फिर गांवों पर हमला कर दिया। इसके बाद कोली स्वर्गीय राजा के समारोह में गए और एक-एक करके अपना परिचय दिया। 

शाम (Evening) को पता चला कि अंग्रेजों ने हार मानकर अंग्रेजी सेना वापस बुला ली है तो बागी कोलीयो न मामलातदार और अंग्रेजी पुलिस वालों को रिहा कर दिया। कुछ दिन बाद Lieutenant Glasspool फिर से अंग्रेजी सेना लेकर बागी कोलीयो के खिलाफ आया। लेकिन उसकी कोलीयो पर हमला करने की हिम्मत नहीं पड रही थी। इसी दोरान Captain Nuttal टरिंबक से सेना लेकर आया और Lieutenant Glasspool के साथ मिल गया। सेना काफी ताकतवर हो गई और बागी कोली पिछे हट गए । लेकिन कुछ दिन बाद बागी कोलीयो न Lieutenant Glasspool और Captain Nuttal की फोज के साथ आमने-सामने की लड़ाई कर दी लेकिन हथियारों की कमी की वजह से हार गए और धर्मपुर रियासत में चले गए। धर्मपुर के राजा ने बागी कोलीयो को पकड़कर अंग्रेजों के हवाले कर दिया और अंग्रेजों ने सभी बागी कोलीयो को फांसी पर लटका दिया। 

In 1857, Kolis Of Peint State/Penth State Revolted Against British Rulen 6th December 1857, The Koli Rebels Plundered The Harsol Town/Harsool Town Of Peint State. The British Officials Sent Mamlatdar (Complicated Matter & Case Officer) To Inspect The Harsol Town. But Koli Rebels Make The Mamlatdar As Prisoner. After Kidnapping The Mamlatdar, Kolis Of Peint State Became More Daring In Peint State. Lieutenant Glasspool Came To Harsol Town To Prevent Kolis But Koli Rebels Attacked The Lieutenant Glasspool & Lieutenant Glasspool Fled Away With His Police Officials. The British Officials Called The King Of Peint State In Katchery. They Found That The Koli Rebellion Was Planned By King Of Peint State & Diwan Of Queen Of Peint State 6 Weeks Ago Only. So British Officials Hanged The King Bhargava Rao & 15 Others. When Kolis Came To Know That King Bhargava Rao Hanged By British, Kolis Attacked The Katchery & Killed All Of British Police & Take The Arms. After This, Koli Rebels Attacked The Treasure & Villages. In Evening, They Went To The Ceremony Of King Bhargava Rao & Gave The Introduction One By One. After Some Time, Koli Rebels Got New News That British Government Recalled His Army To Headquarter. So Koli Rebels Free The Mamlatdar & His Companions. After Some Days , Lieutenant Glasspool Came With His Army Against Koli Rebels. But Lieutenant Glasspool Have No Enough Power To Fight Against Koli Rebels. During This Day, Captain Nuttal Came From Trumbak With His Regiment & Became With Lieutenant Glasspool. Kolis Rebels Back Their Feets Because British Regiment Became More Powerful. But After Some Days Koli Rebels Did Fight With British Regiment Forces. But Kolis Have Lack Of Arms So Koli Rebels Defeated By British Forces. Kolis Rebels Went Away In Dharampur State. But King Of Dharampur State Catched The Koli Rebels & Handed Them To British Officials. All Of Koli Rebels Hanged & Koli Rebellion Burnt Down By British. 

by Koli Prem Singhji Mahaur (https://kolistan.blogspot.com/2017/)

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