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Phoolan Devi

आयरन लेडी फूलन देवी
(10.8.1963--25.7.2001)
जीवन की प्रमुख घटनाएं
प्रतिशोध 14.2.1981 समर्पण 12.2.1983 रिहाई 14.2.1994 धम्म दीक्षा 15.2.1995 संसद प्रवेश 22.5.1996
जन्म, लैंगिक भेदभाव, अशिक्षा 
फूलन देवी का जन्म उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के जालौन जिले में गांव गढ़ का पुरवा में मल्लाह जाति में हुआ था। पिता देवीदीन और माता मूलबाई के 5 संतान थी चार लड़कियां क्रमश: रुकमणी, फूलन देवी, रामकली, मुन्नी तथा एक लडका शिवनारायण। रुकमणी के बाद दूसरी संतान भी पुत्री होने के कारण फूलन देवी के जन्म पर घर में खुशी नहीं थी। माता-पिता की चाहत थी कि दूसरी संतान लड़का हो। भारतीय समाज की पुरुष प्रधान संस्कृति के कारण लड़कियों को हमेशा परिवार पर बोझ समझा गया है।
स्त्रियों के प्रति दोयम दर्जे की सोच को फूलन देवी ने गलत साबित किया। फूलन देवी इतिहास में एकमात्र ऐसी नायिका है जिसने चंबल घाटी में अपना अघोषित साम्राज्य कायम किया। वहीं दूसरी तरफ सांसद चुनी जाकर भारतीय संसद में पहुंची। चंबल के बीहड़ों में शेरनी की तरह दहाडी तो संसद में भी स्त्रियों, दलितों, शोषितों, उपेक्षितों तथा गरीबों की समस्याओं को पूर…
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Tantya Bheel or Mama

जननायक टंट्या भील उर्फ मामा (1842-19.10.1889)
अंग्रेज "इंडियन रॉबिनहुड" तो भारतीय कहते थे "टंट्या मामा"
द न्यूयार्क टाइम्स के 10.11.1889 के अंक में टंट्या भील की गिरफ्तारी की खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी। इसमें टंट्या भील को इंडिया का रॉबिनहुड बताया गया था। टंट्या भील अंग्रेजों का सरकारी खजाना और अंग्रेजों के चाटूकारों का धन लूटकर जरूरत मंदों और गरीबों में बांट देते थे। वह गरीबों के मसीहा थे। वह अचानक ऎसे समय लोगों की सहायता के लिए पहुंच जाते थे, जब उन्हें सहायता की जरूरत होती थी। वह गरीब-अमीर का भेद हटाना चाहते थे। वह छोटे-बड़े सबके मामा थे। टंट्या भील को टंट्या मामा के नाम से भी जाना जाता है। उनके लिए मामा संबोधन इतना लोकप्रिय हो गया कि प्रत्येक भील आज भी अपने आपको मामा कहलाने में गौरव का अनुभव करता है।
खंडवा जिले की पंधाना तहसील के बडदा में 1842 में भाऊसिंह के यहाँ एक बालक ने जन्म लिया, जो अन्य बच्चो से दुबला-पतला था। निमाड में ज्वार के पौधे को सूखने के बाद लंबा, ऊँचा, पतला होने पर ‘तंटा’ कहते है इसीलिए ‘टंट्या’ कहकर पुकारा जाने लगा।
मां का साया बचप…

अमीरी बराका

अमीरी बराका
(7.10.1934-9.1.2017)

दुनिया भर में लोकप्रिय आदिवासी जन संस्कृतिकर्मी और ब्लैक आर्ट मूवमेंट के सबसे प्रखर राजनीतिक नेतृत्वकर्ता 
उन्हें बीसवीं सदी के सबसे बड़े प्रभावशाली ब्लैक चिंतक, साहित्यकार और राजनीतिककर्मी माना जाता है. उन्होंने अमेरिका और दुनिया में हो रहे नस्लीय राजनीति पर सीधा प्रहार किया और आजीवन अपनी ब्लैक पॉलटिक्स के कारण मुख्यधारा के मीडिया व समाज के निशाने पर बने रहे. 
आदिवासियों, एससी और विश्व मानवता के लिए यह बहुत बड़ी क्षति है. नेल्सन मंडेला, राजेंद्र यादव, डॉ.एके झा और ओमप्रकाश लेखक के बाद अमीरी बराका को खो देना दुनिया के उत्पीड़ित समुदायों के लिए बहुत गहरा सदमा है.
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Amiri Baraka From Wikipedia, the free encyclopedia Amiri Baraka Baraka in 2013 BornEverett LeRoi Jones
October 7, 1934
Newark, New Jersey, U.S.DiedJanuary 9, 2014 (aged 79)
Newark, New Jersey, U.S.Pen nameLeRoi Jones, Imamu Amear BarakaOccupationActor, teacher, theater director, theater producer, writer, activ…